कोई भी नही। बस जो कंपनिया अपना पैसा लगाकर समुद्र तल पर ओएफ़सी OFC तारे बिछाती व उसका मरम्मत का काम करती है उसे हमारी टेलीकॉम कंपनिया पैसा देती है और हम सेवा के लिए इन टेलीकॉम कॉम्पनियोंको पैसा देते हैं।
सोचिए इसका मालिकाना हक अगर किसी व्यक्ति या देश के पास होता तो वह देश कितना माला-माल हो जाता. लेकिन सच यह है कि इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है।
इंटरनेट की उत्पत्ति और उसमें रोज़ाना होने वाले इनोवेशनों के लिए सरकारों से लेकर निजी क्षेत्र, इंजीनियर्स, सिविल सोसाइटी के लोगों के अलावा और भी कई क्षेत्रों का सहयोग है।
पर स्थिति तब चिंताजनक हो जाती है जब इंटरनेट पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण रखने की बात की जाए ।
हाल के समय ने इंटरनेट को एक ही अधिकारिक स्थिति में लाने के लिए और बचाने के लिए संयुक्तराष्ट्र के अंतर्गत कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था में लाने के लिए कोशिश कर रहे है. इसके लिए कई देश ऐसा चाह रहे है की इंटरनेट गवर्नेस की एक अलग ही अपनी व्यवस्था बने जिसके द्वारा इंटरनेट को सरकार के नियंत्रण के निचे रखा जा सके।
सोचिए इसका मालिकाना हक अगर किसी व्यक्ति या देश के पास होता तो वह देश कितना माला-माल हो जाता. लेकिन सच यह है कि इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है।
इंटरनेट की उत्पत्ति और उसमें रोज़ाना होने वाले इनोवेशनों के लिए सरकारों से लेकर निजी क्षेत्र, इंजीनियर्स, सिविल सोसाइटी के लोगों के अलावा और भी कई क्षेत्रों का सहयोग है।
पर स्थिति तब चिंताजनक हो जाती है जब इंटरनेट पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण रखने की बात की जाए ।
अमेरिका का दबदबा है इंटरनेट पर...
कुछ बहुत बड़ी-बड़ी कंपनीयां है जो की अमेरिका में स्थित है, जैसे की आप जानते होंगे की एलेक्सा और अमेज़न जैसी वेबसाइट भी अमेरिका की ही है. इसीलिए ही अमेरिका इस इंटरनेट की दुनिया पर अपना दबदबा डालता है ऐसा माना जा सकता है.हाल के समय ने इंटरनेट को एक ही अधिकारिक स्थिति में लाने के लिए और बचाने के लिए संयुक्तराष्ट्र के अंतर्गत कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था में लाने के लिए कोशिश कर रहे है. इसके लिए कई देश ऐसा चाह रहे है की इंटरनेट गवर्नेस की एक अलग ही अपनी व्यवस्था बने जिसके द्वारा इंटरनेट को सरकार के नियंत्रण के निचे रखा जा सके।
